बहराइच: ज्ञानापुर में निर्माणाधीन नाली का दूषित पानी टेढ़ी नदी में गिराने पर विरोध, हस्ताक्षर अभियान चलाया गया
बहराइच: ज्ञानापुर में निर्माणाधीन नाली का दूषित पानी टेढ़ी नदी में गिराने पर विरोध, हस्ताक्षर अभियान चलाया गया
बहराइच। विकास खंड हुजूरपुर की ग्राम सभा ज्ञानापुर में निर्माणाधीन नाली का गंदा एवं दूषित पानी सीधे टेढ़ी नदी में गिराए जाने के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे को समाजसेवी सत्यम ठाकुर ने सोशल मीडिया के माध्यम से उठाया, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर जनसमर्थन तेज हो गया है।
कटुवानाला चौराहे पर हस्ताक्षर अभियान
समस्या के विरोध में रविवार को कटुवानाला चौराहे पर ग्रामीणों द्वारा हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने हस्ताक्षर कर प्रशासन से मांग की कि नाली के दूषित पानी को तत्काल नदी में गिरने से रोका जाए और वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और आस्था का भी गंभीर विषय है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण पर खतरे की आशंका
ग्रामीणों का आरोप है कि नाली का अपशिष्ट जल बिना किसी उपचार के सीधे नदी में प्रवाहित किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो नदी का जल अत्यधिक प्रदूषित हो सकता है। क्षेत्र के कई परिवार घरेलू उपयोग और पशुओं के लिए इसी जल स्रोत पर निर्भर हैं। ऐसे में जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका व्यक्त की जा रही है। साथ ही पर्यावरण को भी दीर्घकालिक क्षति पहुंच सकती है।
धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि धार्मिक त्योहारों के दौरान ग्राम सभा कटुआनाला, टेढ़ी, रायपुर समेत आसपास के गांवों की प्रतिमाएं टेढ़ी नदी में विसर्जित की जाती हैं। ऐसे में नदी की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना आवश्यक है। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी का प्रवाह धार्मिक भावनाओं को भी प्रभावित कर सकता है।
कानून का हवाला
ग्रामीणों ने जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 का हवाला देते हुए कहा है कि बिना उपचार के नालियों का गंदा पानी सीधे नदी में गिराना प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कराई जाए और दूषित पानी को ग्राम सभा के तालाब या अन्य सुरक्षित स्थान की ओर मोड़ने की व्यवस्था की जाए।
आंदोलन की चेतावनी
समाजसेवी सत्यम ठाकुर और ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस प्रकरण में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।


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